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Sunday, 2 November 2025
खामियों का संसार
कल तक थी खूबियां मुझमें बहुत, आज हम खामियों से भर गए, कुछ अपनों की बातें सुन हम तो जीते-जी मर गए ।
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कल तक थी खूबियां मुझमें बहुत, आज हम खामियों से भर गए, कुछ अपनों की बातें सुन हम तो जीते-जी मर गए ।
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